हाल ए दिल
Wednesday, 24 April 2013
जब भी सोंचती हूँ उसे तो ...
हर सोंच में खुशबू आती है….
कुछ लिखती हूँ तो…
हर लफ्ज़ महक जाता है ....
..............ना तू खुदा है… ना ही फ़रिश्ता कोइ…फिर भी तेरी हर बात ... दुआ सी लगती है मुझको .........
Tuesday, 23 April 2013
........लगता है मेरे सारे खतों को ....जला दिया उसने
उठते धुँए में भी तस्वीर उसकी दिख रही है .........
उनके लफ्ज़ -ए - हाल की हैसियत तो देखिये ...........
चुप रह कर भी कितना उलझाते हैं वो ......
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