हाल ए दिल
Wednesday, 6 March 2013
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बरसों से पलकों पर ....अश्कों को रोक रखा था....
....तेरे ख़त के आने से..... सबर तोड़ दी मैंने......
Saturday, 2 March 2013
मेरी बर्बादी कि वजह बनेगा ये....मालूम उसी दिन हो गया था.....जब पहली बार उससे मिले थे हम ....
Friday, 1 March 2013
...सख्त मुश्किल है तिलस्मी शहर में पहचान पाना किसी को .......
....हर एक चेहरे पर ऐसी कशीदाकारी है .......
कभी हसरत थी असमान को छूने की ...अब तमन्ना है असमान के पार जाने की
मेरी तस्वीर के ये नक्स जरा गौर से देखो ... इसमें तुम्हे एक दौर की तारीख नज़र आएगी
अगर फुर्सत मिले तो पूछ लेना ...चाँद तारों से ..मेरे दर्द की कहानी
एक वही तो है हमराज मेरा ..तेरे सो जाने के बाद
उनके लिए होगी बारिश ख़ुशी की बात .... मेरे छत के लिए तो ये एक इन्तेहाँ है
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. . मेरी हंसी ..मेरी अदा में इन्सानियत की बू है ...
. ..किसी को रिझाना मेरा मकसद नहीं...
अपनी किस्मत में शायद सागर नही ...चलो आज रेत निचोड़ कर ही प्यास बुझा लें
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